कन्हैया कुमार बोले : बिहार में ‘डबल इंजन’ खराब, नीतीश नहीं बल्कि कोई और सरकार चला रहा !

बिहार  : कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार  ने बिहार में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति तथा अपराध की हालिया घटनाओं को लेकर मंगलवार को प्रदेश की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन  सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि सरकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं, बल्कि कोई और चला रहा है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि बिहार में ‘डबल इंजन’ पूरी तरह से खराब हो गया है तथा राज्य की मौजूदा स्थिति में ‘‘अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा” की कहावत चरितार्थ हो रही है।

कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के प्रभारी कन्हैया कुमार ने बिहार में शिक्षा की स्थिति का उल्लेख करते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘‘बिहार से एक अजीब घटना सामने आई, जहां  कुछ कॉलेज के प्राचार्यों की नियुक्ति लॉटरी के माध्यम से की गई, जिसके बाद महिला कॉलेज में भी पुरुष प्राचार्य बना दिए गए। इसके बाद कुलपति ने कहा कि बड़े-बड़े लोगों की सिफारिश आती है, इसलिए हमें लॉटरी निकालनी पड़ी।”

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था मनमाने तरीके से चल रही है तथा ‘‘कट-कमीशन का सिस्टम” का हावी है। कुमार का कहना था, ‘‘आप किसी भी कॉलेज में छात्रों की संख्या देखेंगे तो स्थिति का पता पता चलेगा। यदि चार कमरों का कॉलेज है तो हजारों छात्रों का पंजीकरण किया गया है। मतलब पैसा दीजिए, डिग्री लीजिए।” कुमार ने कहा, ‘‘हम बिहार सरकार से मांग करते हैं कि राज्य में शिक्षा की दुर्दशा को देखते हुए तुरंत उचित कदम उठाए जाएं, अन्यथा युवा इस सरकार को बदलने के लिए तैयार हैं।”

बिहार में अपराध की हालिया घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसा कोई शहर नहीं है, जहां गोलियां न चल रही हों। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अपराधी खुले तौर पर अपराध कर रहे हैं और बिहार के उप मुख्यमंत्री (सम्राट चौधरी) बेशर्मी के साथ कहते हैं कि संगठित अपराध खत्म हो गया है।

बिहार में जो अपराध की स्थिति है, उससे पता चलता है कि ये ‘डबल इंजन’ एक-दूसरे की उल्टी दिशा में चल रहे हैं।” उन्होंने दावा किया, ‘‘यह नीतीश कुमार का, सरकार चलाने का तरीका नहीं है। इससे साफ है कि नीतीश कुमार नहीं, बल्कि कोई और सरकार चला रहा है।” कुमार ने कहा, ‘‘मैं बिहार के लोगों से कहना चाहता हूं, जिस सरकार को आपकी चिंता न हो, उसकी कुर्सी छीन लीजिए।” भाषा हक

 

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