संविधान से ‘समाजवाद’ और ‘धर्म निरपेक्ष’ शब्द नहीं हटाए जाएंगे:RSS कर रहा था हटाने की मांग!

नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने का कोई इरादा नहीं है. गुरुवार को राज्यसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस बात की जानकारी दी.

सदन को यह भी बताया गया कि सरकार ने संविधान की प्रस्तावना से इन दो शब्दों को हटाने के लिए कोई भी कानूनी या संवैधानिक प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू नहीं की है. एक लिखित उत्तर में, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि हालांकि कुछ सार्वजनिक या राजनीतिक हलकों में चर्चाएं या बहस हो सकती हैं, लेकिन इन शब्दों में संशोधन के संबंध में “सरकार द्वारा कोई औपचारिक निर्णय या प्रस्ताव की घोषणा नहीं की गई है”.

आपको बता दें, साल 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन के जरिए ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ जैसे शब्द प्रस्तावना में जोड़े गए थे. उस समय देश में इंदिरा गांधी की सरकार थी और जून 1975 से मार्च 1977 तक आपातकाल लागू रहा. सरकार के मुताबिक, इन शब्दों का अर्थ भारत को कल्याणकारी और सभी धर्मों का सम्मान करने वाला राष्ट्र बनाना है.

आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने इन शब्दों को प्रस्तावना से हटाने की मांग की थी. उनका कहना था कि ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ शब्द संविधान में शुरू से नहीं थे, इन्हें आपातकाल के दौरान जोड़ा गया.

 

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