रोज़ी-रोटी के लिए फुटबॉल छोड़ना पड़ा
रियाज़ को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री के वादे के बाद पाकिस्तान में खेलों की स्थिति सुधरेगी. लेकिन समय बीतता गया और कुछ नहीं बदला. उन्हें पैसे कमाने का कोई और रास्ता नहीं मिला, इसलिए उन्होंने फुटबॉल खेलने की बजाय जलेबी बनाने और बेचने का फैसला किया. रियाज़ ने कहा, ‘प्रधानमंत्री के एलान के बाद मुझे उम्मीद थी, लेकिन देरी असहनीय हो गई. आमदनी के बिना, मुझे अपने परिवार का पेट पालने के लिए ईमानदारी से काम करना पड़ा. इसलिए अब मैं सड़क किनारे जलेबी बनाता हूं, फुटबॉल की प्रैक्टिस नहीं करता.’
पाकिस्तान में खिलाड़ियों को नहीं मिलता समर्थन
29 वर्षीय रियाज़ हंगू के रहने वाले हैं और उन्होंने के-इलेक्ट्रिक जैसी बड़ी कॉर्पोरेट टीम के लिए भी खेला है. वो पिछली सरकार को दोष देते हैं, जिसने विभागीय खेलों पर प्रतिबंध लगा दिया था. उनका मानना है कि यह फैसला गलत था और इसने कई खिलाड़ियों को नुकसान पहुंचाया. रियाज़ का कहना है कि विभागों का समर्थन जरूरी है क्योंकि समाज में खेलों को प्राथमिकता नहीं दी जाती. वो सोचते हैं कि जब युवा उन्हें संघर्ष करते देखेंगे, तो उनमें फुटबॉल खेलने की इच्छा कैसे जागेगी.