लखनऊ. सेना पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से राहत नहीं मिली है. हाईकोर्ट ने लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट की ओर से जारी तलबी आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है. अदालत ने राहुल गांधी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपों की जांच के आधार पर निचली अदालत का आदेश उचित है.
यह मामला राहुल गांधी के एक कथित बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “चीनी सैनिक हमारे सैनिकों की पिटाई कर रहे हैं.” यह टिप्पणी भारत छोड़ो यात्रा के दौरान दी गई थी. इसी के आधार पर सीमा सड़क संगठन (BRO) के सेवानिवृत्त निदेशक उदय शंकर श्रीवास्तव ने राहुल गांधी के खिलाफ लखनऊ की एमपी-एमएलए अदालत में आपराधिक मानहानि का परिवाद दायर किया था. अदालत ने इस परिवाद को संज्ञान में लेते हुए राहुल गांधी को बतौर आरोपी तलब किया था.
राहुल गांधी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उनके वकीलों ने दलील दी कि लगाए गए आरोप तथ्यहीन और मनगढ़ंत हैं और राहुल गांधी लखनऊ के निवासी नहीं हैं, इसलिए उन्हें तलब करने से पहले आरोपों की सत्यता की जांच जरूरी थी.
साथ ही यह भी कहा गया कि बिना पर्याप्त आधार के ट्रायल में शामिल करना अनुचित होगा. हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी खामी नहीं है. हाईकोर्ट का विस्तृत आदेश सोमवार को उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा.