बिहार में बने रेल इंजनों की अफ्रीका में सप्लाई, 100 KM प्रति घंटे की रफ्तार- PM मोदी ने पहली खेप को दिखाई हरी झंडी

बिहार  : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकारी निजी भागीदारी से बिहार के सारण जिले के मढ़ौड़ा निर्मित एवं पश्चिम अफ्रीका के तटीय देश गिनी को निर्यात होने वाले पहले मेक इन इंडिया अत्याधुनिक रेल डीजल इंजन को शुक्रवार को हरी झंडी दिखाई। सीवान में आयोजित एक कार्यक्रम में वीडियो लिंक के माध्यम से इस डीजल रेल इंजन को हरी झंडी दिखाई।

इस मौके पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सतीश कुमार भी उपस्थित थे। गिनी के राष्ट्रपति ममाडी डोमबोया के गांव कोमा के नाम पर इंजन का नामकरण किया गया है। यह सारण जिला ही नहीं, बिहार और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। देश के इतिहास में यह पहली बार होगा कि मेड इन इंडिया और मेक इन इंडिया लेबल लगा रेल लोकोमोटिव इंजन विदेशी धरती, विशेष रूप से गिनी गणराज्य की रेल पटरियों पर दौड़ेगा।

यह आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मढ़ौरा रेल इंजन कारखाना अमेरिकी कंपनी वेबटेक और भारत सरकार के रेल मंत्रालय का एक संयुक्त उद्यम है। इस कारखाने का शिलान्यास 2007 में हुआ था और 17 सितंबर को इसका उत्पादन शुरू हो गया था।

इन सभी लोकोमोटिव्स में वातानुकूलित कैब होगा। प्रत्येक लोको में सिंगल कैब होगी और दो इंजन मिलकर अधिकतम स्वीकार्य गति के साथ 100 वैगनों का भार वहन करेंगे। इन इंजनों के निर्माण के लिए, मढ़ौड़ा लोकोमोटिव परिसर में तीन प्रकार के ट्रैक बनाए गए हैं-ब्रॉड गेज, मानक गेज और केप गेज। भारतीय रेलवे का बिहार का मढ़ौड़ा संयंत्र लोकोमोटिव निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। यहां निर्मित किए जा रहे लोकोमोटिव, भारत के औद्योगिक पदचिह्न को बढ़ावा देते हैं।

इस फैक्टरी में 285 लोग सीधे काम पर हैं और 1215 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है इनमें से 80 प्रतिशत लोग बिहार झारखंड के हैं और 25 फीसदी महिला कर्मी हैं। इनके अलावा, 2100 से अधिक लोग सेवाओं और अन्य कार्यों के लिए देश भर में संयुक्त उद्यम के लिए काम कर रहे हैं। यह भारत का गिनी की सबसे बड़ी लौह अयस्क परियोजना के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण में योगदान देगा, जिससे भारत-अफ्रीका आर्थिक सहयोग प्रगाढ़ होगा।

 

 

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