बिहार : बिहार में हरियाली का उत्सव शुरू हो चुका है. वन महोत्सव के तहत राज्य में अगले तीन महीनों में 5 करोड़ पौधे लगाने का भव्य लक्ष्य रखा गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 13 जुलाई को पौधा लगाकर इस अभियान की शुरुआत की. सागवान, जामुन, महोगनी जैसे पेड़ों से बिहार को और हरा-भरा करने की इस मुहिम में हर कोई हिस्सा ले सकता है. स्कूल-कॉलेज के बच्चों से लेकर किसानों और आम लोगों तक, सभी के लिए मुफ्त पौधे और आकर्षक योजनाएं तैयार की गई हैं. आइए, जानते हैं इस हरित क्रांति की पूरी कहानी.
वन महोत्सव के तहत बिहार में जुलाई से सितंबर तक 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है. इनमें सागवान, महोगनी, सेमल, जामुन और अर्जुन जैसे पेड़ शामिल हैं. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुसार, इस अभियान का मकसद न सिर्फ पौधरोपण करना है, बल्कि वनों का संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ाना भी है. अब तक जुलाई में 30 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, और यह सिलसिला तेजी से चल रहा है.
इस महा-अभियान में कई विभाग और संगठन कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं. अकेले वन विभाग 1 करोड़ 7 लाख पौधे लगाएगा. इसके अलावा, जीविका समूह 57 लाख, मनरेगा 1.93 लाख, सरकारी स्कूल-कॉलेज 37.16 लाख और किसान 56 लाख पौधे लगाने में योगदान देंगे. ग्रामीण विकास विभाग, सामाजिक संगठन और गैर-सरकारी संस्थाएं भी इस मुहिम का हिस्सा हैं.
पौधे लगाना ही काफी नहीं, उनकी देखभाल भी जरूरी है. इसके लिए विभाग ने किसानों को प्रति पौधा 10 रुपये देने का प्रस्ताव रखा है. तीन साल तक पौधों की देखभाल करने वाले किसानों को प्रत्येक पेड़ के लिए 60 रुपये और पहले दिए गए 10 रुपये सब्सिडी के रूप में मिलेंगे. यह योजना न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी बनेगी.