गुजरात : गुजरात में आम आदमी पार्टी को विसावदर उपचुनाव में मिली जीत की खुशी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी. उपचुनाव में जीत के तीसरे दिन ही पार्टी को अपने बोटाद विधायक उमेश मकवाना को पांच साल के लिए निलंबित करना पड़ा. मकवाना पर पार्टी विरोधी और गुजरात विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं.
गुजरात AAP अध्यक्ष इशुदान गढ़वी ने गुरुवार को इस निलंबन की घोषणा की. इससे पहले, मकवाना ने गुरुवार को ही पार्टी के सभी पदों- संयुक्त सचिव और गुजरात विधानसभा में चीफ व्हिप-से इस्तीफा दे दिया.
सोमवार को विसावदर उपचुनाव में AAP की जीत ने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरा था. यह सीट BJP के दिग्गज नेता भूपेंद्रसिंह चुडास्मा के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी और AAP के उम्मीदवार ने कड़े मुकाबले में जीत हासिल की. यह जीत AAP की गुजरात में बढ़ती पैठ का संकेत थी, जहां पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीतकर उभरी थी. लेकिन मकवाना का निलंबन इस उत्साह पर पानी फेरता नजर आता है.
मकवाना ने अपने इस्तीफे में दावा किया कि वह सामाजिक सेवाओं पर ध्यान देना चाहते हैं और कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगे. हालांकि, कुछ पोस्ट्स में कहा गया कि मकवाना दलित समुदाय को पार्टी में उचित प्रतिनिधित्व न मिलने से नाराज थे. उन्होंने AAP पर आंबेडकर के सिद्धांतों से भटकने का भी आरोप लगाया.
मकवाना की नाराजगी की जड़ में पार्टी के भीतर आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व के साथ मतभेद थे. कुछ कार्यकर्ताओं का दावा है कि मकवाना ने हाल के महीनों में पार्टी की रणनीतियों खासकर उपचुनाव में उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाए थे.
गढ़वी ने निलंबन को अनुशासनात्मक कार्रवाई करार देते हुए कहा कि पार्टी-विरोधी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी. मकवाना ने गुजरात के हितों के खिलाफ काम किया. हालांकि, उन्होंने विशिष्ट गतिविधियों का खुलासा नहीं किया.
रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि यह निलंबन AAP की गुजरात इकाई में बढ़ते असंतोष को दर्शाता है, जहां पार्टी को संगठनात्मक एकता बनाए रखने में चुनौतियां मिल रही हैं. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मकवाना का निलंबन AAP के लिए नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि वह दलित और ग्रामीण मतदाताओं के बीच लोकप्रिय थे.