यूपी : उत्तर प्रदेश स्थित इटावा में कथावाचकों के साथ हुई अभद्रता के मामले में सियासत तेज हो गई है. एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी लगभग चुप है तो वहीं समाजवादी पार्टी, कानून व्यवस्था और सामाजिक ताने बाने के मुद्दे को आधार बनाकर राज्य सरकार के खिलाफ मुखर है.
सपा न सिर्फ इस मामले पर मुखर है बल्कि गोरखपुर में तिवारी हाता और विरासत गलियारे पर हुए विवाद को लेकर भी सक्रिय हैं. सपा चीफ अखिलेश यादव, इस तरह दो नाव पर सवार होते हुए सियासी नैय्या पार लगाने की कोशिश कर रहे हैं.
इटावा की बात करें तो इस पूरे घटनाक्रम को सपा अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश में है. मामला सामने आने के बाद पहले से दिन से ही सपा और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ-साथ सभी नेता सक्रिय हैं और राज्य सरकार को घेर रहे हैं.
अखिलेश अगर चाहते तो वह यह भी कह सकते थे कि यादवों को क्यों पीटा जा रहा है लेकिन यह कहने के बजाय, उनका फोकस इस बात पर है कि पिछड़े वर्ग के लोगों को कथा वार्ता करने से रोका जा रहा है. दूसरी ओर अखिलेश अपनी इस रणनीति के जरिए ब्राह्मणों को नाराज भी नहीं करना चाहते, इसलिए वह सीधा नाम लेने या जुबानी हमला करने की जगह ‘प्रभुत्ववादी और वर्चस्ववादी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल कर रहे हैं. ताकि सपा और उनसे, ब्राह्मण वर्ग नाराज न हो.
अखिलेश ने शुक्रवार, 27 जून को ही एक बयान में कहा कि – आज संपूर्ण पीडीए समाज ‘इटावा कथावाचन पीडीए अपमान कांड’ के हर पीड़ित के साथ अपनी आवाज़ बुलंद कर रहा है. ’पीडीए’ उत्पीड़न के ख़िलाफ़ नई ढोलक की नई गूंज है. यानी अखिलेश का दावा है कि न सिर्फ पिछड़ा वर्ग बल्कि अगड़े और समाज के अन्य वर्ग भी इस मामले में पीड़ितों के साथ हैं.
इटावा कांड में पिछड़ों के साथ अखिलेश, पूर्वांचल में ब्राह्मणों को भी अपने साथ लाने की कोशिश में लगे हुए हैं.सपा नेता ने गोरखपुर में ‘विरासत गलियारे’ के मामले में सपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, विधान परिषद् में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव को रोके जाने पर कहा था कि बीजेपी को न हाता भाता है, न पीडीए.
इतना ही नहीं इटावा कांड में सपा की सक्रियता और नेताओं के बयानबाजी से ब्राह्मणों में सपा के प्रति नाराजगी न हो इसलिए वह डैमेज कंट्रोल करने के लिए अखिलेश, सुल्तानपुर जाएंगे. यहां वह सपा के पूर्व विधायक संतोष पांडेय के दफ्तर जाएंगे.