बेरोजगारी सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है: बिहार चुनाव से पहले सर्वे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

बिहार : बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो रही हैं. इस बीच अब एक ताजा सर्वे में दलित वोटरों के रुझान को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. इसने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. राज्य की कुल आबादी में दलिताें की 19.65% हिस्सेदारी है. ऐसे में लगातार ये सवाल पूछे जा रहे हैं कि दलितों का झुकाव किस तरफ होगा? अब इसी को लेकर सर्वे किया गया है.

इस सर्वे में करीब 18,581 मतदाताओं के सैंपल लिए गए हैं. आंकड़ों में ये सामने निकलकर आया है कि इस बार दलित वोटर महागठबंधन की ओर झुकते नजर आ रहे हैं. वहीं, पहले के मुकाबले एनडीए की पकड़ कमजोर होती दिख रही है. सर्वे के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दलितों के बड़े नेता बने हुए हैं. वहीं, राहुल गांधी इसमे दूसरे नबंर पर हैं.

सर्वे के अनुसार, 46.13% दलित वोटर महागठबंधन के साथ हैं. वहीं, 31.93% ने एनडीए कर समर्थन किया. दोनाें के बीच का 14% का ये अंतर बिहार के लिए एक बड़ा इशारा कर रहा है. बता दें कि इससे पहले 2020 में भी महागठबंधन को 46% और एनडीए को 36% दलित वोट मिले थे. लेकिन इस बार एनडीए का समर्थन 4% घटकर 32% रह गया है.

सर्वे का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है कि 71% दलित मतदाताओं को इस बात का डर है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान उनका नाम वोटर लिस्ट से कट सकता है. केवल 32% दलित ऐसे हैं जिन्हें इसका डर नहीं है.

सर्वे के मुताबिक, 58.9% दलितों ने बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा बताया और 62% ने बदलाव की जरूरत जताई. वहीं, वोट देने के आधार पर सवाल पूछा गया तो 45% दलित मतदाता उम्मीदवार के कामकाज और छवि को प्राथमिकता दी. इसके बाद 32% ने पार्टी या गठबंधन को देखकर वोट करने की बात कही, जबकि केवल 12% ही जातीय आधार पर अपना वोट तय करने की बात करते नजर आए.

 

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