संघर्ष के बावजूद सेवा का समर्पण: बृजेश कुमार की प्रेरणादायक कहानी

 

ब्रजेश चौहान पत्रकार के बारे में!

समाज सेवा का जज़्बा किसी संसाधन का मोहताज नहीं होता। अगर दिल में सच्ची लगन हो, तो बिना गाड़ी, बिना सुविधा के भी एक इंसान समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। बृजेश कुमार इसका जीता-जागता उदाहरण हैं।

 

ना चार पहिया, ना सुविधा— फिर भी सेवा जारी

 

बृजेश कुमार के पास न तो चार पहिया गाड़ी है, न ही चलने के लिए कोई विशेष व्यवस्था। फिर भी, वे हजारों गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए दिन-रात समर्पित रहते हैं। जहां कई लोग साधन-संपन्न होते हुए भी समाज सेवा के लिए समय नहीं निकाल पाते, वहीं बृजेश जी बिना किसी स्वार्थ के लगातार लोगों की मदद कर रहे हैं।

 

उनका मानना है—

“अगर इरादा नेक हो, तो संसाधन मायने नहीं रखते। हर मुश्किल रास्ता भी मंज़िल तक ले जाता है, बस चलने की हिम्मत होनी चाहिए।”

 

सपनों को साधनों की नहीं, हौसले की जरूरत होती है

 

बृजेश कुमार ने अब तक 30,000 से अधिक गरीब बच्चों को ड्रेस, बैग और शैक्षिक सामग्री वितरित की है। साथ ही, 100 से ज्यादा गरीब बच्चों को टॉप स्कूलों में प्रवेश दिलाकर उनका भविष्य संवारा है।

 

इसके लिए वे न किसी गाड़ी के भरोसे रहे, न किसी सुविधा की परवाह की। चाहे पैदल चलना पड़े, किसी से लिफ्ट लेनी पड़े, या सार्वजनिक साधनों का उपयोग करना पड़े— उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

 

“बड़े लोग” सुविधाओं के साथ, लेकिन सेवा से दूर!

 

आज समाज में कई लोग खुद को प्रभावशाली मानते हैं। उनके पास बड़ी गाड़ियाँ, ऊँचे पद और तमाम सुविधाएँ हैं, लेकिन जब सेवा करने की बात आती है, तो उनके पास “समय नहीं है” या फिर वे दिखावे तक सीमित रह जाते हैं।

 

बृजेश कुमार ने इस सोच को तोड़ा है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि

“सेवा गाड़ियों से नहीं, संकल्प से होती है। संसाधन नहीं, समर्पण बदलाव लाता है।”

 

सच्ची सेवा वही, जो दिल से हो!

 

बृजेश कुमार आज पूरे जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता मिशन के तहत शिक्षा जागरूकता का अभियान चला रहे हैं। वे बिना किसी भौतिक सुविधा के भी सरकारी योजनाओं को ज़रूरतमंदों तक पहुँचाने में जुटे हैं।

 

उनकी कहानी हम सबके लिए प्रेरणा है कि—

“अगर दिल में समाज सेवा का जज़्बा हो, तो रास्ते की कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती।”

 

बृजेश कुमार जैसे सच्चे समाजसेवी ही असली बदलाव लाते हैं, क्योंकि वे सुविधा के बिना भी सेवा में समर्पित रहते हैं।

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